Toll Free: 18002330055
contact@cgscpcr.gov.in
cgscpcr icon

CGSCPCR HIGHLIGHTS

 

Latest News




Updated of CGSCPCR website

CGSCPCR is relaunching a new website with a fresh look (Cgncpcr एक नई वेबसाइट के साथ एक ताजा रूप से पुन: लॉन्च कर रहा है)




CGSCPCR conducting a research on “Slow Learner”

CGSCPCR conducting a research on “Slow Learner” in collaboration with Pandit Ravishankar University, Raipur Chhattisgarh



आयोग को प्राप्त शक्तियाॅं

जांच से संबंधित शक्तियाॅ

आयोग स्वप्रेरणा से भी प्रकरणों का संज्ञान में लेकर कार्यवाही कर सकता है। राज्य बाल संरक्षण आयोग को अधिनियम की धारा 13 की उपधारा (1) के खण्ड (ञ) में निर्दिष्ट किसी विषय की जांच करते समय और विशिष्टतया निम्नलिखित विषयों के संबंध में वे सभी शक्तियाॅं दी गई है जो सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (1908 का 5) के अधीन किसी वाद का विचारण करते समय सिविल न्यायालय की होती है, अर्थात:-
(क) किसी व्यक्ति को समन जारी करना और हाजिर कराना तथा शपथ पर उसकी परीक्षा करना,
(ख) किसी दस्तावेज का प्रकटीकरण और पेश किया जाना,
(ग) शपथ पत्रों पर साक्ष्य लेना,
(घ) किसी न्यायालय या कार्यालय से किसी लोक अभिलेख या उसकी प्रतिलिपि की अध्यपेक्षा करना, और
(ड) साक्षियों या दस्तावेजों की परीक्षा के लिए कमीशन निकालना ।
(2) आयोग को किसी मामले को ऐसे मजिस्ट्रेट को भेजने की शक्ति होगी जिसे उसका विचारण करने की अधिकारिता है और वह मजिस्ट्रेट जिसे कोई ऐसा मामला भेजा जाता है, अभियुक्त के विरूद्ध परिवाद सुनने के लिए इस प्रकार अग्रसर होगा मानो वह मामला दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 (1974 का 2) की धारा 346 के अधीन उसको भेजा गया है ।

जांच के पश्चात् कार्यवाई

आयोग, बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम 2005 की धारा 15 में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए इस अधिनियम के अधीन की गई किसी जांच को पूरा होने पर, निम्नलिखित कार्यवाही कर सकेगा, अर्थात :-
(क) जहाॅं जांच से बालक अधिकारों के किसी गंभीर प्रकृति के अतिक्रमण का या तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के उपबंधों का उल्लंघन होना प्रकट होता है वहाॅं, वह सम्बद्ध सरकार या प्राधिकारी से संबंधित व्यक्ति या व्यक्तियों के विरूद्ध अभियोजन के लिए कार्यवाहियाॅं या ऐसी अन्य कार्रवाही जो आयोग ठीक समझे, आरंभ करने के लिए सिफारिश कर सकेगा,
(ख) उच्चतम न्यायालय या संबंधित उच्च न्यायालय से ऐसे निर्देशों, आदेशों या रिटों के लिए जो वह न्यायालय उचित समझे, अनुरोध कर सकेगा,
(ग) पीड़ित व्यक्ति या उसके कुटुम्ब के सदस्यों को ऐसी तत्काल अंतरिम सहायता मंजूर करने की, जो आयोग उचित समझे, सम्बद्ध सरकार या सक्षम प्राधिकारी को सिफारिश कर सकेगा।